यह है पहाड़ों पर बसे देवी के 10 प्रसिद्ध मंदिर

इस लेख में हम आपके देवी के 10 ऐसे फेमस मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पहाड़ों पर स्थापित हैं। साथ ही जानिए हर मंदिर से जुड़ी 2-2 खास बातें.. 1. कनक दुर्गा मंदिर, आंध्र प्रदेश  यहां पहाड़ी को लेकर मान्यता है कि अर्जुन ने यहीं पर भगवान शिव की तपस्या की थी और उनसे पाशुपतास्त्र प्राप्त किया था। कहते है इस मंदिर की देवी प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी, इसलिए इसे…

"यह है पहाड़ों पर बसे देवी के 10 प्रसिद्ध मंदिर"

माँ सिद्धिदात्री : हर कार्य सिद्ध करने वाली मां दुर्गा की नौवीं शक्ति

मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार…

"माँ सिद्धिदात्री : हर कार्य सिद्ध करने वाली मां दुर्गा की नौवीं शक्ति"

माँ महागौरी : अलौकिक सिद्धियां देती हैं मां दुर्गा की आठवीं शक्ति…

नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है।  अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है इनको। इनके ऊपर…

"माँ महागौरी : अलौकिक सिद्धियां देती हैं मां दुर्गा की आठवीं शक्ति…"

माँ कालरात्रि : काल से रक्षा करती है मां दुर्गा की सातवीं शक्ति.

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।  लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।  वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥   नाम से अभिव्यक्त होता है कि मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली…

"माँ कालरात्रि : काल से रक्षा करती है मां दुर्गा की सातवीं शक्ति."

मां कात्यायनी : अमोघ फलदायिनी हैं मां दुर्गा की छठवीं शक्ति

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।  कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥ नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती…

"मां कात्यायनी : अमोघ फलदायिनी हैं मां दुर्गा की छठवीं शक्ति"

स्कंदमाता : जीवों में नवचेतना देती हैं दुर्गा की पांचवीं शक्ति

मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है स्कंदमाता की कृपा से…  सिंहसनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।  शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥ पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। नवरात्रि में पांचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में…

"स्कंदमाता : जीवों में नवचेतना देती हैं दुर्गा की पांचवीं शक्ति"

मां कुष्मांडा : सुख-समृद्धि देती हैं मां दुर्गा की चौथी शक्ति

ब्रह्मांड को उत्पन्न करनेवाली मां कुष्मांडा  सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।  दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे।  नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए…

"मां कुष्मांडा : सुख-समृद्धि देती हैं मां दुर्गा की चौथी शक्ति"

माँ चंद्रघंटा : कल्याणकारी है मां दुर्गा की तीसरी शक्ति

अलौकिक वस्तुओं के दर्शन कराती हैं मां चंद्रघंटा  पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।  प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ मां दुर्गा की तीसरी शक्ति हैं चंद्रघंटा। नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा-आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इसीलिए कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है। इस…

"माँ चंद्रघंटा : कल्याणकारी है मां दुर्गा की तीसरी शक्ति"

माँ ब्रह्मचारिणी : सर्व सिद्धि देती हैं मां दुर्गा की दूसरी शक्ति.

जीवन के कठिन क्षणों में संबल देती हैं मां ब्रह्मचारिणी  दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।  देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥  मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह…

"माँ ब्रह्मचारिणी : सर्व सिद्धि देती हैं मां दुर्गा की दूसरी शक्ति."

शैलपुत्री : मां दुर्गा की पहली शक्ति…

अनंत शक्तियों से संपन्न हैं देवी का पहला स्वरूप  वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।  वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥ नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर दुर्गा देवी के नौ रूपों की पूजा-उपासना बहुत ही विधि विधान से की जाती है। इन रूपों के पीछे तात्विक अवधारणाओं का परिज्ञान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री के बारे में… मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता…

"शैलपुत्री : मां दुर्गा की पहली शक्ति…"

इन 9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा

इन 9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं। इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधि‍यां, जिन्हें मां दुर्गा के विभि‍न्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि‍ स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा…

"इन 9 औषधियों में विराजती है नवदुर्गा"

माँ दुर्गा के नव रूप की विशेषताए एवं मन्त्र विधि

शैलपुत्री – पहले दिन माँ दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। पर्वतराजहिमालय के यहाँ पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा था। भगवती का वाहन वृषभ, दाहिने हाथ में त्रिशूल, और बायें हाथ में कमल सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम सती था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। एक बार वह अपने पिता के यज्ञ में गईं तो…

"माँ दुर्गा के नव रूप की विशेषताए एवं मन्त्र विधि"